Sai Chalisa – Full Lyrics, Significance, Benefits & Daily Recitation Guide
Sai Baba of Shirdi is known as the universal saint who preached unity of all faiths and emphasised the power of Shraddha (faith) and Saburi (patience). One of the most beloved ways of worshipping Sai Baba is through the recitation of Sai Chalisa, a devotional hymn containing forty verses that glorify Baba’s divine life, miracles, qualities and teachings.
॥ साईं चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
जय साईं सच्चिदानंद, सदगुरु सेवक बंध।
दीनबंधु दुःखहरण, करप्रेमानंद॥
॥ चालीसा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्या दास तुम, देहु अभय वरदान॥ 1॥
शिरडी के सद्गुरु सुखदाई, साईंनाथ दयाल।
अंतर्यामी पूर्ण प्रगट, पालनकर्ता काल॥ 2॥
साई साईं नाम जो जपे, मिटे संकट अपार।
दया दृष्टि हो जो साई की, जीवन बने सँवार॥ 3॥
उदी प्रसाद की महिमा भारी, मिटते रोग विकार।
सांचे मन से जो धरे, भवसागर के पार॥ 4॥
श्रद्धा सबुरी का उपदेश, साईं ने जग पाया।
भर दे झोली प्रेम की, जिसने उसे बुलाया॥ 5॥
जैसे कण–कण में बसते, साईं सर्वव्यापक।
वैसे भक्तों के संकट, हरते पल चमत्कारिक॥ 6॥
धन्य-धन्य शिरडी धाम, जहाँ साईं का वास।
आए जो भी द्वार पर, संकट का नाश॥ 7॥
तेरी कथा अनंत है साईं, पार नहीं कोई पावे।
दारिद्र्य हरो जगत के दाता, भक्त निवेदित धावे॥ 8॥
साईं बाबा तुझसे करूँ, विनती बारंबार।
राखो चरणों में स्थान, करो कल्याण हमारा॥ 9॥
मूर्ति तेरी मनोहर प्यारी, जग में जगमग जावे।
जो भी तुझको शीश नवावे, मनवांछित फल पावे॥ 10॥
साईं तू ही माँ–पिता है, साईं तू भगवान।
तेरी महिमा पार नहीं, वाणी कहे कहाँ॥ 11॥
इन चालीसा के पाठ से, मिटे पाप अपार।
विघ्न दुःख सारा टले, हो सुख की बहार॥ 12॥
काज सभी सिद्ध करे, मनवांछित फल दे।
जो भक्त प्रेम सहित सदा, साईं नाम ले॥ 13॥
संतानहीन दंपति भी, तुमसे माँग दुआ।
तुरंत पूर्ण होती है, कृपा दृष्टि से तू॥ 14॥
शिरडी वाले साईं बाबा, बसो सदा उर बीच।
तुम बिन सूना जीवन, सुन लो मेरी भी चीख॥ 15॥
भक्ति मार्ग पर चलूँ सदा, देना शक्ति अपार।
तेरे नाम का जप करूँ, कष्ट ना आवे द्वार॥ 16॥
जन्म मरण के फेर से, मुक्त करो भगवन।
साईं चरणों में मिले, सच्चा मोक्ष महान॥ 17॥
जो नर–नारी पढ़े सदा, साईं चालीसा प्रेम।
साईं दाता सब सुख दे, मिटे संकट क्षेम॥ 18॥
॥ दोहा ॥
साईं साईं कहत हीं, सब दुख भरे भाग।
कृपा दृष्टि हो साईं की, तो बन जाए काज॥
॥ साईं चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
जय साईं सच्चिदानंद, सदगुरु सेवक बंध।
दीनबंधु दुःखहरण, करप्रेमानंद॥
॥ चालीसा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्या दास तुम, देहु अभय वरदान॥ 1॥
शिरडी के सद्गुरु सुखदाई, साईंनाथ दयाल।
अंतर्यामी पूर्ण प्रगट, पालनकर्ता काल॥ 2॥
साई साईं नाम जो जपे, मिटे संकट अपार।
दया दृष्टि हो जो साई की, जीवन बने सँवार॥ 3॥
उदी प्रसाद की महिमा भारी, मिटते रोग विकार।
सांचे मन से जो धरे, भवसागर के पार॥ 4॥
श्रद्धा सबुरी का उपदेश, साईं ने जग पाया।
भर दे झोली प्रेम की, जिसने उसे बुलाया॥ 5॥
जैसे कण–कण में बसते, साईं सर्वव्यापक।
वैसे भक्तों के संकट, हरते पल चमत्कारिक॥ 6॥
धन्य-धन्य शिरडी धाम, जहाँ साईं का वास।
आए जो भी द्वार पर, संकट का नाश॥ 7॥
तेरी कथा अनंत है साईं, पार नहीं कोई पावे।
दारिद्र्य हरो जगत के दाता, भक्त निवेदित धावे॥ 8॥
साईं बाबा तुझसे करूँ, विनती बारंबार।
राखो चरणों में स्थान, करो कल्याण हमारा॥ 9॥
मूर्ति तेरी मनोहर प्यारी, जग में जगमग जावे।
जो भी तुझको शीश नवावे, मनवांछित फल पावे॥ 10॥
साईं तू ही माँ–पिता है, साईं तू भगवान।
तेरी महिमा पार नहीं, वाणी कहे कहाँ॥ 11॥
इन चालीसा के पाठ से, मिटे पाप अपार।
विघ्न दुःख सारा टले, हो सुख की बहार॥ 12॥
काज सभी सिद्ध करे, मनवांछित फल दे।
जो भक्त प्रेम सहित सदा, साईं नाम ले॥ 13॥
संतानहीन दंपति भी, तुमसे माँग दुआ।
तुरंत पूर्ण होती है, कृपा दृष्टि से तू॥ 14॥
शिरडी वाले साईं बाबा, बसो सदा उर बीच।
तुम बिन सूना जीवन, सुन लो मेरी भी चीख॥ 15॥
भक्ति मार्ग पर चलूँ सदा, देना शक्ति अपार।
तेरे नाम का जप करूँ, कष्ट ना आवे द्वार॥ 16॥
जन्म मरण के फेर से, मुक्त करो भगवन।
साईं चरणों में मिले, सच्चा मोक्ष महान॥ 17॥
जो नर–नारी पढ़े सदा, साईं चालीसा प्रेम।
साईं दाता सब सुख दे, मिटे संकट क्षेम॥ 18॥
॥ दोहा ॥
साईं साईं कहत हीं, सब दुख भरे भाग।
कृपा दृष्टि हो साईं की, तो बन जाए काज॥



















