Shiv Chalisa – Complete Hymn, Meaning & Spiritual Significance
Shiv Chalisa is a forty-verse hymn dedicated to Lord Shiva, one of the most revered deities in Hinduism. This devotional chant praises Shiva’s divine attributes, his role as the destroyer of negativity, and his power to bestow blessings, prosperity, and spiritual awakening. Chanting the Shiv Chalisa is considered highly auspicious, especially on Maha Shivratri, Mondays, or during personal pujas.
शिव चालीसा
दोहा:
जय शिव ओंकारा, हर हर महादेव।
भूतनाथ शिव शंकर, जग में त्रिलोक के सेव।
चौपाई:
भोलेनाथ शंकर, कैलाशपति प्रभु।
त्रिशूलधर, गंगाधर, शरणागत वरद कृप।
महाकाल, नीलकंठ, भूतनाथ भवानीपति।
सकल दोष हरे, भक्तों के सुखदाता शिव।
जगत रचयिता, संहारक, पालनकर्ता।
योगीश्वर, ध्यानमय, तपस्वी अनंत।
अर्धनारीश्वर रूप, जगत के पालनहार।
त्रिपुरारी, शूलधारी, शांति के आधार।
कैलाश वास, हिमालयपति, भूतनाथ महादेव।
गंगाधर, भस्मरूपी, दीनानाथ शिव।
ब्रह्मा विष्णु, रुद्र का साथी, शंभू त्रिलोकपति।
ब्रह्मांड के स्वामी, चारों युगों के रक्षक।
भक्तों के संकट हरने वाले, महादेव अनंत।
दुष्टों के नाशक, धर्म के रक्षक, कृपालु शिव।
त्रिशूल में शक्ति, जटा में गंगा, चंद्रमा सजीव।
नागबंधिनी, वृषभध्वज, जगत के पालक शिव।
भक्तजननाथ, हर हर महादेव, शरणागत वरद।
काल, मृत्यु, समय के नियामक, सुखदाता शिव।
तपस्वियों के प्रेरक, साधुओं के साथी, योगीश्वर।
संहारक भूत, देवता मित्र, जगतनाथ शिव।
भूतभावन, भूतनाथ, त्रिलोकीनाथ महादेव।
मस्तक में चंद्रमा, गले में सर्प, त्रिशूलधारी।
कैलाशपति, शंभू, भोलेनाथ, भूतनाथ।
भक्तों की रक्षा करने वाले, हर हर महादेव।
योग, ध्यान, तप, शक्ति के स्रोत, अनंत शिव।
सुख, समृद्धि, ज्ञान देने वाले, भक्तजननाथ।
शरणागतों के संहारक, संकटहर शिव।
दीनबंधु, करुणा के स्वरूप, भोलेनाथ।
महाकाल, कालभैरव, जगतपाल।
भक्तों के आश्रयदाता, त्रिपुरारी, शंकर।
शिवशक्ति के स्वरूप, ब्रह्मांडपालक।
हर हर महादेव, शंभू, भक्तजननाथ।
संकट, रोग, पाप नाशक, कृपालु शिव।
योग, साधना, ध्यान, मोक्ष देने वाले।
कैलाश वास, हिमालयपति, संहारक शिव।
त्रिशूलधारी, गंगाधर, भक्तों के हितैषी।
भक्तों के रक्षा करने वाले, दीनबंधु शिव।
ध्यान, तप, योग से शक्ति देने वाले।
महादेव, भोलेनाथ, भक्तों के सुखदाता।
जय शिव ओंकारा, हर हर महादेव।
दोहा:
जय शिव ओंकारा, हर हर महादेव।
भूतनाथ शिव शंकर, जग में त्रिलोक के सेव।
शिव चालीसा
दोहा:
जय शिव ओंकारा, हर हर महादेव।
भूतनाथ शिव शंकर, जग में त्रिलोक के सेव।
चौपाई:
भोलेनाथ शंकर, कैलाशपति प्रभु।
त्रिशूलधर, गंगाधर, शरणागत वरद कृप।
महाकाल, नीलकंठ, भूतनाथ भवानीपति।
सकल दोष हरे, भक्तों के सुखदाता शिव।
जगत रचयिता, संहारक, पालनकर्ता।
योगीश्वर, ध्यानमय, तपस्वी अनंत।
अर्धनारीश्वर रूप, जगत के पालनहार।
त्रिपुरारी, शूलधारी, शांति के आधार।
कैलाश वास, हिमालयपति, भूतनाथ महादेव।
गंगाधर, भस्मरूपी, दीनानाथ शिव।
ब्रह्मा विष्णु, रुद्र का साथी, शंभू त्रिलोकपति।
ब्रह्मांड के स्वामी, चारों युगों के रक्षक।
भक्तों के संकट हरने वाले, महादेव अनंत।
दुष्टों के नाशक, धर्म के रक्षक, कृपालु शिव।
त्रिशूल में शक्ति, जटा में गंगा, चंद्रमा सजीव।
नागबंधिनी, वृषभध्वज, जगत के पालक शिव।
भक्तजननाथ, हर हर महादेव, शरणागत वरद।
काल, मृत्यु, समय के नियामक, सुखदाता शिव।
तपस्वियों के प्रेरक, साधुओं के साथी, योगीश्वर।
संहारक भूत, देवता मित्र, जगतनाथ शिव।
भूतभावन, भूतनाथ, त्रिलोकीनाथ महादेव।
मस्तक में चंद्रमा, गले में सर्प, त्रिशूलधारी।
कैलाशपति, शंभू, भोलेनाथ, भूतनाथ।
भक्तों की रक्षा करने वाले, हर हर महादेव।
योग, ध्यान, तप, शक्ति के स्रोत, अनंत शिव।
सुख, समृद्धि, ज्ञान देने वाले, भक्तजननाथ।
शरणागतों के संहारक, संकटहर शिव।
दीनबंधु, करुणा के स्वरूप, भोलेनाथ।
महाकाल, कालभैरव, जगतपाल।
भक्तों के आश्रयदाता, त्रिपुरारी, शंकर।
शिवशक्ति के स्वरूप, ब्रह्मांडपालक।
हर हर महादेव, शंभू, भक्तजननाथ।
संकट, रोग, पाप नाशक, कृपालु शिव।
योग, साधना, ध्यान, मोक्ष देने वाले।
कैलाश वास, हिमालयपति, संहारक शिव।
त्रिशूलधारी, गंगाधर, भक्तों के हितैषी।
भक्तों के रक्षा करने वाले, दीनबंधु शिव।
ध्यान, तप, योग से शक्ति देने वाले।
महादेव, भोलेनाथ, भक्तों के सुखदाता।
जय शिव ओंकारा, हर हर महादेव।
दोहा:
जय शिव ओंकारा, हर हर महादेव।
भूतनाथ शिव शंकर, जग में त्रिलोक के सेव।



















